दशा फल विचार
27 Apr
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दशा फल विचार

Posted By: Yagyadutt Times Read: 32

दशा का फलित किस प्रकार करे

दशा फल विचार एक महत्वपूर्ण कार्यशैली है| ज्योतिष फलित मे ज्योतिषी को मुख्य तीन बातों का ध्यान रखना होता है|

1.   उन्हे भावो से घटनाओ के बारे मे जानकारी मिलती है|

2.   कौन सी घटना कब घटित होगी यह जानकारी उन्हे दशा से मिलती है|

3.   दशा के साथ-साथ हमे गोचर को भी ध्यान मे रखना पड़ता है यदि गोचर भी घटना का कार्यक्षेत्र होता है तो घटना अवश्य घटती है और उसके कितने प्रतिशत परिणाम मिलेंगे ये भी आप आसानी से निकाल सकते है|

दशा फलित मे विशेष रूप से हमे महादशा-अंतर्दशा-प्रत्यंतर दशा के फलो को निकालना होता है| महादशा बहुत लंबे समय तक होती है इसलिए महादशा का महत्व कृष्णामूर्ति पद्धति मे कुछ कम हो जाता है| अधिकांशत जब व्यक्ति दो लेवल की दशा महादशा व अंतर्दशा का ही परिणाम निकाल रहा होता है तो महत्व अधिक होता है| यदि किसी व्यक्ति की कोई भी महादशा है और कोई भी अंतर्दशा है तो उसको क्या परिणाम मिलेंगे|

कृष्णामूर्ति पद्धति के द्वारा महादशा व अंतर्दशा के फल:-

दशा स्वामी किस नक्षत्र स्वामी पर बैठा है तथा वह नक्षत्र स्वामी किन-किन भावो का कार्येष है उस दशा मे आपको उन भावो के परिणाम मिलेंगे|

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