Bansuri

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Product Code: vastu22
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फेंगशुई : शुभ है घर में बांसुरी रखना

बांसुरी के संबंध में एक धार्मिक मान्यता है कि जब बांसुरीको हाथ में लेकर हिलाया जाता है तो बुरी आत्माएं दूर हो जाती हैं और जब इसे बजायाजाता है तो ऐसी मान्यता है कि घरों में शुभ चुम्बकीय प्रवाह का प्रवेश होता है।

बांसुरी काष्ठ वाद्य परिवार का एक संगीत उपकरण है। नरकट वाले काष्ठ वाद्य उपकरणों के विपरीतबांसुरी एक एरोफोन या बिना नरकट वालावायु उपकरण है जो एक छिद्र के पार हवा के प्रवाह से ध्वनिउत्पन्न करता है। होर्नबोस्टल-सैश्स के उपकरणवर्गीकरण के अनुसारबांसुरी को तीव्र-आघात एरोफोन के रूप मेंवर्गीकृत किया जाता है।

बांसुरीवादक को एक फ्लूट प्लेयरएक फ्लाउटिस्टएक फ्लूटिस्टया कभी कभी एक फ्लूटर के रूप मेंसंदर्भित किया जाता है।

बांसुरी पूर्वकालीन ज्ञात संगीत उपकरणों में से एक है।करीब 40,000 से 35,000 साल पहले कीतिथि की कई बांसुरियां जर्मनी के स्वाबियन अल्बक्षेत्र मेंपाई गई हैं। यह बांसुरियां दर्शाती हैं कि यूरोप में एक विकसित संगीत परंपराआधुनिक मानव की उपस्थिति के प्रारंभिक काल से ही अस्तित्व में है।

बांसुरी ध्वनिविज्ञान

जब यंत्र के छिद्र के आर-पार वायु धारा प्रवाहित की जाती हैजिससे छिद्र परवायु कंपन होने के कारण बांसुरी ध्वनि उत्पन्न करता है।

छिद्र के पार वायु एक बरनॉली या सिफॉन सृजितकरती है जिसका प्रभाव वॉन कारमनवोरटैक्स स्ट्रीट तक होता है। यह बांसुरी में सामान्यतः मौजूदबेलनाकार अनुनादी गुहिका में वायु कोउत्तेजित करती है। वादक यंत्र के छिद्रों को खोल एवं बंदकर के ध्वनि के स्वर में परिवर्तन करता हैइस प्रकार यह अनुनादी की प्रभावीलंबाई एवं इसके सदृश अनुनाद आवृत्ति में परिवर्तनहोता है। वायु दाब में परिवर्तन के द्वारा एवं किसी भी छिद्र को खोले और बंद कियेबगैर आधारभूत आवृत्ति के अलावा भीबांसुरी को गुणित स्वर पर अनुवाद के द्वारा वादक स्वर में भी परिवर्तनकर सकता है।

सामान्यतः गुणवत्ता या "ध्वनि रंग"जिसे स्वर कहतेहैंमें परिवर्तन होता है क्योंकि बांसुरी कई भागोंएवं गहनताओं में सुर उत्पन्न करसकते हैं। ध्वनि-रंग में छिद्र की आंतरिक आकृति जैसे कि शंक्वाकार नोक मेंपरिवर्तन के द्वारा परिवर्तन या सुधार किया जा सकता है। सुर एक आवृति है जो एकनिम्न रजिस्टर पूर्णांक गुणक है या बांसुरी का "आधारभूतनोट है।सामान्यतः उच्च सुर उच्च अंशों की उत्पत्ति में वायु धारा पतली (अधिक रूपों मेंकंपन)तीव्र (वायु के अनुनाद को उत्तेजित करने केलिये अधिक ऊर्जा उपलब्ध कराना) एवं छिद्र के पार कम गहरे (वायु धारा का अधिक छिछलेपरावर्तन हेतु) प्रवाहित की जाती है।

बीम के प्रभाव को कम करने के लिए बांसुरियों पर लाल रिबन लपेट कर बीम के साथ इस प्रकार लटकाते है कि बांसुरी का मुंह नीचे की ओर रहे और आपस ममे त्रिकोण बनाये|

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