राहु की उपासना अनिष्ट शांति

  • “ॐ रां राहवे नम:” मंत्र का अधिक से अधिक जाप करे, दूर्वा के द्वारा हवन करे|
  • नाग-पंचमी का व्रत करे तथा नागदेव की पूजा-अर्चना करे|
  • नव नाग स्त्रोत का दैनिक पाठ करे|
  • सप्त धान्य या तिल और काले कम्बल का दान करे|
  • सुवर्ण की नाग मूर्ति बनाकर, घर में स्थापित करे, प्रतिदिन केसर चंदन से पूजा करे और नव नाग स्त्रोत व नाग मंत्र “ॐ नागराजय विदमहे कद्रूवंशाय धीमहि तन्नो सर्प: प्रचोदयात”| का जप करे|

नवनाग स्त्रोत:ॐ अनन्त वासुकि शेश पदमनाभ च कम्बलम |
शंखपाल ध्रतराष्ट तक्षक कालिय तथा |
ऐतानी नव नामानि नागाना च महात्मनाम |
प्रात: काले पठेन्नित्य सांय काले विशेषत: |
तस्य विषभय नास्ति सर्वत्र विजयी भवेत |

  • उड़द, गोमेद रत्न, कला घोडा, खड़ग, नीला वस्त्र, ऊनी कम्बल, तिल, तेल अभ्रक, सप्तधान्य तथा सुवर्ण का दान करे|
  • नहाने के पानी में नागरमोंथा, बिल्वपत्र, लाल चन्दन, तथा केसर-कस्तुरी मिलाकर स्नान करे तथा शनिवार को गोमेद रत्न धारण करे| किसी अच्छे ज्योतिषी की सलाह लेकर|
  • कुलदेवता का पूजन करे तथा अपने निवास स्थान में वास्तु सुधार कराएं|
  • शनिवार को अष्टगंध द्वारा अनार की कलम से भोजपत्र पर राहु यंत्र लिख कर धारण करे|
  • चिडियों को की डी नंगरा सीचे| जौ का आटा+बाजरे का आटा+काले तिल कूट कर डाले एवम बुरा चीनी+देशी घी+नारियल का बुरादा|
  • काले कुत्ते को रोटी खिलाये अधिक परेशानी होने पर कंगन(इमरती) दो से ज्यदान्ही कुत्ते को खिलावे|
  • दुर्गाजी के बत्तीस नाम का पाठ करे|
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