मंगल की अनिष्ट शांति

  • “ॐ अं अंगारकय नम:” मंत्र का जाप करे|
  • ताम्र पत्र पर निर्मित मंगल यंत्र की स्थापना कर प्रतिदिन पूजा करे|
  • हनुमान चालीसा या सुन्दरकाण्ड का पाठ करे|
  • ताम्र पत्र में गेंहू व गुड भरकर दान करे|
  • ताम्र पत्र में भरे हुए जल का सेवन करे|
  • मंगलवार को गेंहू के आटे व गुड से निर्मित भोज्य पदार्थ घर में तैयार करे और हनुमानजी के भोग लगाये|
  • लाल रंग के वस्त्रो का दान करे| पुरुष वर्ग दुपट्टे या अंगोछा और स्त्री वर्ग लाल रंग की धोती आदि मन्दिरों में चढ़ाए|
  • लाल धागा सीधे हाथ पर बांध कर रखे|
  • गुड, मसूर दाल, गेंहू, केसर, मूंगा, घी, लाल कनेर के पुष्प,लाल गाय, ताम्र पात्र, कस्तुरी व भूमि का यथाशक्ति दान करे|
  • बिल्ववृक्ष की छाल, रक्त चन्दन, रक्त पुष्प, माल कांगनी और मौलसिरी इन सभी वस्तुओ को समान भोग लेकर चूर्ण करके नहाने के पानी में डाल कर स्नान करने से मंगल जनित अनिष्ट कम हो जाते है|
  • मंगलवार को हनुमान जी के सिंदूर का चोला चढ़ाए और गुड का भोग लगाए|
  • मंगलवार को व्रत करे और भोजन में गुड से बनी वस्तुए ग्रहण करे|
  • किसी मंगलवार को सिद्ध योग में भोजपत्र या ताम्र पत्र पर मंगल यंत्र बनाकर धारण करे|
  • राम रक्षा स्त्रोत का पठन करे|
  • सुंदर काण्ड मंगलवार व शनिवार को करे|
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