होली का महत्व
28 Mar
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होली का महत्व

Posted By: Yagyadutt Times Read: 138

होली 

रंगबिरंगे पर्व होली की धूम भारत में चारों तरफ दिखाई दे रही हैं। इस साल होली का त्यौहार  29 मार्च 2021 को मनाया जाएगा। होलिका दहन (छोटी होली) 28 मार्च को है। यह पर्व फाल्गुन महीने की पूर्णिमा को आता है।

होली के साथ विभिन्न तरह की कहानियां जुड़ी हुई हैं, उन्हीं में से एक प्रहलाद और हिरण्यकश्यप की कहानी है।

पौराणिक कथा के अनुसार, शक्तिशाली राजा हिरण्यकश्यप था, वह खुद को भगवान मनाता था और चाहता था कि हर कोई भगवान की तरह उसकी पूजा करें. वहीं अपने पिता के आदेश का पालन न करते हुए हिरण्यकश्यप के पुत्र प्रहलाद ने उसकी पूजा करने से इंकार कर दिया और उसकी जगह भगवान विष्णु की पूजा करनी शुरू कर दी। इस बात से नाराज हिरण्यकश्यप ने अपने पुत्र प्रहलाद को कई सजाएं दी जिनसे वह प्रभावित नहीं हुआ।

इसके बाद हिरण्यकश्यप और उसकी बहन होलिका ने मिलकर एक योजना बनाई की वह प्रहलाद के साथ चिता पर बैठेगी। होलिका के पास एक ऐसा कपड़ा था जिसे ओढ़ने के बाद उसे आग में किसी भी तरह का नुकसान नहीं पहुंचता, दूसरी तरह प्रहलाद के पास खुद को बचाने के लिए कुछ भी न था।

जैसे ही आग जली, वैसे ही वह कपड़ा होलिका के पास से उड़कर प्रहलाद के ऊपर चला गया। इसी तरह प्रहलाद की जान बच गई और उसकी जगह होलिका उस आग में जल गई। यही कारण है होली का त्यौहार बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है।

होलिका दहन के दिन एक पवित्र अग्नि जलाई जाती है जिसमें सभी तरह की बुराई, अंहकार और नकारात्मकता को जलाया जाता है। अगले दिन, हम अपने प्रियजनों को रंग लगाकर त्योहार की शुभकामनाएं देते हैं साथ ही नाच, गाने और स्वादिष्ट व्यंजनों के साथ इस पर्व का मजा लेते हैं। सड़कों पर गुलाबी, पीला, हरा और लाल रंग बिखरा दिखाई देता है और लोग अपने दोस्तों और परिवारजनों को त्यौहार की बधाई देते हैं।

होलिका दहन का मुहूर्त

होलिका दहन मुहूर्त शाम 06 बजकर 37 मिनट से रात 08 बजकर 56 मिनट तक

अवधि- 02 घंटे 20 मिनट 

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