राधा अष्टमी
25 Aug
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राधा अष्टमी

Posted By: Yagyadutt Times Read: 33
राधा अष्टमी
15 दिन पहले यानी भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को भगवान श्री कृष्ण का जन्म उत्सव यानी जन्माष्टमी मनाई जाती है| राधा रानी द्वापर युग में प्रकट हुईं| उनका प्राकट्य मथुरा के रावल गांव में वृषभानु जी की यज्ञ स्थली के पास हुआ| उनकी माता का नाम कीर्ति और पिता का नाम वृषभानु है‌|
राधा अष्टमी के दिन चंद्रमा वृश्चिक राशि और अनुराधा नक्षत्र में रहेगा| सूर्य सिंह राशि में, बुध सिंह राशि में, राहु और शुक्र मिथुन राशि में, गुरु और केतु धनु राशि में, शनि अपनी स्वंय की राशि मकर में और मंगल अपनी मूल त्रिकोण राशि मेष में स्थित रहेंगे| जिसके अनुसार इस दिन ग्रहों की स्थिति काफी शुभ रहेगी| जिसके अनुसार आपको राधा कृष्ण की पूजा का कई गुना लाभ प्राप्त हो सकता है|
राधा अष्टमी पूजा विधि
1.राधा अष्टमी के दिन सूर्योदय से पहले उठना चाहिए। उसके बाद पूरे घर की सफाई करनी चाहिए।इसके बाद स्नान करके साफ वस्त्र धारण करने चाहिए।
2.इसके बाद व्रत का संकल्प लेना चाहिए और राधा जी की प्रतिमा को पंचामृत से स्नान कराना चाहिए और उनको नए वस्त्र और श्रृंगार से सजाना चाहिए।
3.इसके बाद राधा जी और भगवान श्री कृष्ण की प्रतिमा स्थापित करें। प्रतिमा स्थापित करने के बाद धूप, दीप, फल, फूल आदि चढ़ाना चाहिए।
4.राधा रानी और भगवान श्री कृष्ण की विधिवत पूजा करनी चाहिए। राधा अष्टमी की कथा सुननी चाहिए।
5. अंत में राधा जी और भगवान श्री कृष्ण की आरती उतारनी चाहिए और शाम के समय सिर्फ फलों का सेवन करना चाहिए।
राधा रानी के मंत्र
तप्त-कांचन गौरांगी श्री राधे वृंदावनेश्वरी
वृषभानु सुते देवी प्रणमामि हरिप्रिया
ॐ ह्रीं श्रीराधिकायै नम:।
ॐ ह्रीं श्रीराधिकायै विद्महे गान्धर्विकायै विधीमहि तन्नो राधा प्रचोदयात्।
श्री राधा विजयते नमः, श्री राधाकृष्णाय नम:
शुभ मुहूर्त
सर्वार्थ सिद्धि योग सुबह 5 बजकर 50 मिनट से दोपहर 1 बजकर 05 मिनट तक रहेगा
25 अगस्त दिन मंगलवार को 06 बजकर 45 मिनट से अष्टमी तिथि शुरू
26 अगस्त दिन बुधवार को अष्टमी तिथि 02 बजकर 15 मिनट तक
राधा अष्टमी उद्यापन विधि
1.राधा जी के व्रत के उद्यापन में एक सूप लिया जाता है।
2. उस सूप में श्रृंगार की सभी वस्तुएं रखी जाती है।
3. इसके बाद सूप को ढंक दिया जाता है और 16 दीए जलाए जाते हैं।
4. इसके बाद चंद्रमा को अर्ध्य दिया जाता है और लक्ष्मी जी को घर आने का निमंत्रण दिया जाता है।
5.अंत में श्रृंगार की सभी वस्तुओं को दान कर दिया जाता है।
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