निर्जला एकादशी
23 Jun
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निर्जला एकादशी

Posted By: Yagyadutt Times Read: 343
ज्येष्ठ मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी को निर्जला एकादशी कहा जाता है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा पूरे विधि विधान से की जाती है। निर्जला एकादशी के दिन व्रत रखने के साथ ऊं नमो भगवते वासुदेवाय नम: का 108 बार जप करने से अक्षय पुण्य मिलता है। इस बार निर्जला एकादशी 23 जून 2018 को है। माना जाता है कि इस एक एकदाशी के व्रत से 23 एकादशियों के व्रत का फल मिलता है। ज्येष्ठ मास की शुक्ल पक्ष की 'निर्जला एकादशी' सभी एकादशियों में सबसे सर्वश्रेष्ठ मानी गई है।

पूजन विधि

एकादशी तिथि के सूर्योदय से अगले दिन द्वादशी तिथि के सूर्योदय तक जल और भोजन का त्याग किया जाता है। इसके बाद दान, पुण्य आदि कर इस व्रत का विधान पूर्ण होता है। इस दिन सर्वप्रथम भगवान विष्णु की विधिपूर्वक पूजा करें। ओम नमो भगवते वासुदेवायः मंत्र का जाप करें। इस दिन व्रत करने वालों को चाहिए कि वह जल से कलश भरें व सफेद वस्त्र को उस पर रखें और उस पर चीनी तथा दक्षिणा रखकर ब्राह्मण को दान दें। इस दिन कलश और गौ दान का विशेष महत्व है।

कौन से काम इस दिन नही करने चाहिए :-

एकादशी की रात को सोना नहीं चाहिए। पूरी रात जागकर भगवान विष्णु की भक्ति करनी चाहिए। इससे भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है।

एकादशी के दिन पान खाना भी वर्जित माना गया है। पान खाने से मन में रजोगुण की प्रवृत्ति बढ़ती है।

इस दिन चावल का सेवन नहीं करना चाहिए। कहा जाता है कि इस दिन चावल का सेवन करने वाला पाप का भागी बनता है।

चुगली करने से मान-सम्मान में कमी आ सकती है। कई बार अपमान का सामना भी करना पड़ सकता है।

एकादशी पर क्रोध भी नहीं करना चाहिए। इससे मानसिक हिंसा होती है।

ये जानकारियां धार्मिक आस्थाओं और लौकिक मान्यताओं पर आधारित हैं, जिसे मात्र सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर प्रस्तुत किया गया है।


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